Saturday, 28 April 2018

कौन हो तुम

क्या ख्वाब मेरे तुझे भी
परेशान किया करते हैं
जैसे की सपने तेरे, मुझे
दिन में भी दिखा करते हैं।

तू चाँद तो नहीं है, और 
तू तबस्सुम भी तो नहीं
हुस्न न मुरझा बरसों से,
इसपे अमावस भी नहीं।

तू आफताब हो सकती थी,
चमक से तेरी लोग जलते हैं
पर याद में तेरी जो ठंडक है
हिमाला की चोटी में भी नहीं

कुदरत का हर हुनर है तुझमें
जुदा से लगते है जलवे तेरे
खुद तू ही बता अपने बारे में
कही तू खुद  ही ख़ुदा तो नहीं




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