Thursday, 29 March 2018

जीवन मृत्यु चक्र

जीवन जब तक है, तब तक है
स्वास, आस, नींद, भूख प्यास।
विदा होगी ये काया नश्वर , रहेंगे
पात्र मात्र बन, किस्सा, इतिहास।
विचारों में कदा चिंतन करते रहते
मिल जाते, मिल पाते हम काश।
पाश्ताचप, अंतर्द्वन्द, अंतर्व्यथा
होता अपना कोई जो निश्वास।
इस पार न मिले कोई कभी तो
कर्म कर, किंचित न हो उदास
ईश्वर की तार से गुँथे हम सब
मिलेंगे उस पार,  रख बिश्वास

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