Wednesday, 14 March 2018

विरह व मिलन

ये मेरे मन की जो तारें हैं
कई तारों को छू आती हैं
या तो जब तुम आते हो
या याद तुम्हारी आती है

विचारों में विचरण करते
विह्वलता मन में आती है
जब साथ तुम्हे न पाता हूँ
और याद तुम्हारी आती है

शांत उर गति हो जाती है
अचंभित सा रह जाता हूँ
जब याद तुम्हारी आती है
और दर्श तुम्हारे पाता हूँ






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