Friday, 24 November 2017

पहुँच मेरी आत्मा की

नहीं मात्र इस शरीर में
हूँ जहाँ तक है ये नजर
तेरा मेरी आँखों में और
मेरा तेरी आँखों में बसर

आदमी सोच सा हो जाता है
पर ऐसा अवसर न हुआ
बहुत सोचा तेरे बारे में पर
मैं अब तक ईश्वर न हुआ

मेरे पास ईशवर था के नहीँ
तेरी याद तो हमेशा ही रही
कोई मलाल नही दुख़ नहीँ
के
ना खुदा ही मिला न विसाले सनम

2 comments:

  1. hmm....milega...sabr ya kabr...better sabr...bahutt khubb

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  2. Achcha hota jo Sabr gar kabr tak le jaata
    No vo mile na khuda mein paata to bhi kya kya paatA

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