Sunday, 5 June 2016

जीवन एक कहानी

कहानी सा लगता है पर सच है,
जीवन एक कहानी ही तो है.
प्यार, गुस्सा, मान, अपमान,
बचपन, बुढ़ापा, जवानी ही तो है.
अपने होते अनजाने, दूर होते अपने,
सपनों सा सच, सच होते सपने.
टूटे कांच में अपनी सौ शक्लें पाना,
एक ही चोट में इतना बिखर जाना.
आंसू सारे पी जाना, मुस्कराना,
ख़ुशी के मारे अश्कों का बह जाना,
खुदा से दुआ करना, मंदिर जाना,
अपने आप में खोना, चुप चुप रोना
हंसना बेतहाशा, नित नई आशा,
उम्मीदें जोड़, बंधन को तोड़,
आगे की सोचना, बीते की छोड़,
मेरे मन, सच है,
कहानी ही तो है जीवन.

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