Friday, 20 May 2016

नयी विश्व व्यवस्था

सिमटा हूँ बदलती प्रोफाइल पिक में                 
कहीं किसी एप्प की डीपी बन गया,                 
कहीं एक सौ चालीस में सीमित हो,                
रिश्तों को चैट से स्नैप कर रहा हूँ

कभी घूम आता हूँ दोस्तों के पेज पर,              
उनके घर के लोगों को मिल आता हूँ               
जो मुझे जानते पहचानते नहीं शायद
तस्वीरों को देख, लाइक लिख आता हूँ

फ़ॉर्वर्डेड मेसेज मेरी खबरें हो गयीं हैं,              
सच-झूठ सर्च कर के पता लगाता हूँ.              
मान लेता हूँ ऐसे खोजी की बातें,                 
जिसने खुद इंका को इंडिया माना था.             

No comments:

Post a Comment